चांद पर भी होगी खेती

चांद पर भेजे गए चीन के ई 4 यान ने चांद पर सफलता पूर्वक पौधे उगाना चालू कर दिया है। चीन की अंतरिक्ष एजेंसी (सीएनएसए) ने तस्वीर जारी की है जिसमें कपास के बीज को उगता हुआ देखा जा सकता है। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब चन्द्रमा कि सतह पर जैविक खेती की गई हो। सीएनएसए ने दावा किया है कि आने वाले 100 दिनों में और अधिक पौधे उगाए जाएंगे। इन पौधों पर अध्ययन यान पर विशेष रूप से डिजाईन किए गए बायोस्फीयर से किया जा रहा है।

रस्सी का सहारा ले कर किया गंगा को साफ

गंगा को साफ करने और स्वच्छता का संदेश लोगों तक पहुंचाने के लिए बीइंग भगीरथ के सिंयोजक शिखर पालिवाल ने रस्सी के सहारे गंगा में उतर कर गंदगी को साफ किया। उनके साथ गंगा भक्तों ने भी बह रहे कचरे को रस्सी के माध्यम से कूड़ा निकाला। 
इस अवसर पर शिखर पालीवाल ने बताया कि युवा भगीरथों के अथक प्रयास से ही गंगा घाटों को निर्मल स्वच्छ बनाया जा रहा है। रस्सी के सहारे गंगा में उतरकर गंगा भक्तों ने कूड़े को बाहर निकाला।  
बीइंग भगीरथ अपने प्रयासों से अन्य लोगों को भी प्रेरणा दे रहा है।

गंगा को निर्मल स्वच्छ बनाने में सभी को अपनी सहभागिता निभानी चाहिए। उन्होंने बताया कि सफ़ाई के दौरान लोगों को चोटें भी लगी। गंगा के तटों पर फंसे कूड़े को निकालने में टीम भगीरथ के सभी सदस्य कड़ी मेहनत करते हैं। सैकड़ों गंगा भक्त निःस्वार्थ भाव से गंगा सफाई अभियान से जुड़ रहे हैं। निश्चित तौर पर गंगा को प्रदूषण मुक्त करने में हमारे प्रयास कहीं भी कम नहीं होंगे। 

पेंटिंग से दिया स्वच्छता का संदेश

बीइंग भगीरथ मिशन के तहत हरिद्वार को स्वच्छ सुन्दर बनाने की मुहिम शुरू की गई है। जिसमें स्कूली बच्चों ने दीवारों पर वॉल पेंटिंग बनाकर शहर को सुन्दर बनाने के लिए जनजागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। इसकी शुरूआत अलकनंदा घाट की गई। शहर को सुन्दर और स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को सहयोग देना जरूरी है। 

इस अभियान में 40 स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने दीवारों पर पेंटिंग कर के शहर को सुन्दर और स्वच्छ बनाने का संदेश दिया। बीइंग भगीरथ के संस्थापक और पेंटिंग ड्राइव के संयोजक शिखर पलिवाल ने बताया कि शहर को स्वच्छ सुंदर बनाने के लिए बीइंग भगीरथ टीम के सदस्यों ने अघोषित कूड़े वाले स्थानों पर बच्चों से वॉल पेंटिंग करवायी। शिखर पहले से ही गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए लगातार गंगा घाटों पर सफाई अभियान का कार्य करते आ रहे हैं। 

बीइंग भगीरथ मिशन में अलकनंदा मार्ग पर दीवारों पर पेंटिंग कर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान पर खास ध्यान दिया गया है। दीवारों पर स्लोगन लिख कर लोगों को जागरूक किया गया है। बच्चों ने जिस तरह अपने हाथों से पेंटिंग के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया है वह एक सकारात्मक पहल है। 

हर हाल में गंगा को देनी है नई जिंदगी

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ठंड की सुबह जब शायद ही किसी को सुबह सुबह बिस्तर से उठना पसंद होगा। ठंड के दिनों में जो मजा सुबह की नींद का है वो और कहां…. सर्दीे के दिन… जनवरी का महीना… 3 डिग्री सेल्सियस तापमान…. ठंड से भी ठंड़ा पानी… ठंड के दिनों में पानी के नाम से ही ठंड लग जाती है और अगर मैें कहूं कि कुछ लोग ऐसे भी है जो इस ठंड में भी पानी में काम कर रहे हैं पर उनकी आवाज में ठंड का एहसास भी नहीं है अगर कुछ है तो वो हेै उनका हौसला… उनकी लगन…उनकी सेवा….उनका जज्बा और एक चाह भारत की पर्वित नदी गंगा को साफ कर.. गंगा नदी को प्रदूषण से मुक्त कर के उसे एक नया जीवन देने की।
जी हां, आप बिल्कुल सही सोच रहे हैं मैं बात कर रही हूं स्पर्श गंगा टीम की जो बिना किसी स्वार्थ के गंगा को नई जिदंगी देने में अपने समय के साथ ही साथ पूरा योगदान भी दे रहे हैं। इस टीम ने अपने 15वें चरण में हर की पौड़ी पर कंपकपाती ठंड में पूरे जोश के साथ गंगा सफाई अभियान चलाकर ये साबित कर दिया है कि यह टीम गंगा को एक दिन जरूर अपने प्रयासों से प्रदूषण मुक्त कर देगी।
आपको बता दें कि स्पर्श गंगा टीम ने हरिद्वार के विभिन्न गंगा घाटों के अलावा विभिन्न ग्राम सभाओं में भी स्वच्छता अभियान चलाया है। स्पर्श गंगा के सदस्यों ने ग्राम सभाओं में जन चेतना फैलाते हुए 10 आदर्श गंगा ग्रामों मुख्य रूप से बालावाली, कलसिया, गोवर्धनपुर, फतवा, सलेमपुर, नूरपुर पंजनहेड़ी को चिन्हित कर के स्वच्छता अभियान की शुरूआत की है।

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स्पर्श गंगा के सदस्यों ने ये साबित कर दिया है कि चाहे हालात कैसे भी हो हमारे हौसले तो एक दम पक्के हैं जिन्हें न ठंड तोड़ सकती है न कुछ और….

टीम के संयोजक शिखर पालीवाल ने कहा कि 2009 से निरन्तर स्पर्श गंगा के सदस्य गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने की मुहिम चला रहे हैं, लेकिन लोगों द्वारा गंगा को अलग-अलग तरीके से प्रदूषित किया जा रहा है जो कि खेद की विषय है। आने वाली पीढ़ी के ल्ए यह एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। शिखर ने आगे कहा ्कि बड़े पैमाने पर पालतू मृत पशु गंगा में बहाये जा रहे हैं जो कि स्वच्छता अभियान को पलीता लगा रहा है। स्पर्स गंगा के सदस्य जनमानस की सूचनाओं पर गंगा से मृत पशुओं को निकालने में भी अपना सहयोग प्रदान कर रहे हैं। जागरूकता के बाद भी कुछ विभाग नए गंदे नाले सीधे गंगा में समाहित किए जा रहे हैें। जो कि हमारे प्रयास के असफल होने में अपनी भूमिका निभा रहा है। हमने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चला रहे हैं। शासन प्रशासन को भी गंगा में समाहित नालों की शिकायत त्वरित की जा रही है।
प्रेमनगर घाट पर बड़े पैमाने पर खाने का वस्तुएं गंगा घाट पर लोगों द्वारा स्वयं डाली जा रही है जिसको रोकने का प्रयास किया जा रहा है। गंगा को स्वच्छ मिर्मल, अविरल बहने दें गंगा में कूड़ा करकट ना फेंके। टीम लगातार हरिद्वार नगरी सहित पूरे प्रदेश में जनजागरुता अभियान समय-समय पर चलाती आ रही है। गंगा की सफाई में हिस्सा लेने वालों के हन्नी सैन, विपिन, मोनू चंदेल, हीरो मोटो कॉर्प के कर्मचारी, बीएचईएल टीम के सदस्य और अन्य संस्थाओं के लोग भी अलग-अलग जगहों से अपना योजदान दें रहें हैं।

गंगा का गेम फॉर गंगा

स्पर्श गंगा अभियान टीम के सदस्यों के साथ नया अध्याय जुड़ने से स्पर्श गंगा टीम को और ज्यादा उर्जा मिल रही है। स्पर्श गंगा अभियान में शामिल जर्मन एम्बेसी एंव जीआई जेड के सदस्यों ने इस जनसहभगिता के अभियान में जुड़ने की मुहिम को प्रारंभ किया। विदित हो कि उत्तराखंड सरकार को जर्मन एम्बेसी एवं जीआई जेड के द्वारा गंगा स्वच्छता को लेकर जन जागरण के लिए विशेष पैकेज भी दिया जाना है। जिसको स्पर्श गंगा टीम के माध्यम से कराने की पहल जर्मनी के लोगों ने प्रारंभ कर दी है।

स्पर्श गंगा टीम के संयोजक शिखर पालीवाल ने बताया कि जर्मन एम्बेसी जीआई जेड के सदस्यों ने स्पर्श गंगा सफाई अभियान में जुड़ने की पहल करते हुए स्पर्श गंगा टीम द्वारा गेम ऑफ गंगा का सर्जन किया गया है जिसमें जर्मनी के लोगों ने प्रतिभाग करते हुए गेम ऑफ गंगा के आयामों को बारिकी से देखा। इस खेल के माध्यम से गंगोत्री से गंगासागर तक 5 राज्यों को दर्शाया गया है। जहां-जहां गंगा प्रदूषित हो रही है और जहां-जहां सहायक नदियां जुड़ रही है उन सभी बिन्दुओं को इस खेल के माध्यम से बच्चों में जागरूकता लाने के लिए दर्शाया गया है। स्पर्श गंगा अभियान टीम के सदस्यों ने प्रण लेकर गंगा को प्रदूषण मुक्त की यह पहल विदेशों तक पहुंच रही है। जिसमें भारत में रहने वाले विदेशा नागरिक भी स्पर्श गंगा अभियान से जुड़ रहे हैं। शिखर पालीवाल ने बताया कि गंगा से जुड़े इस गेम फॉर गंगा को बनाने में 5 राज्यों के विभिन्न जृश्यों को डाइस गेम के माध्यम से दर्शाया गया है जिससे युवाओं में गंगा की स्वच्छता का संदेश फैलेगा। निश्चित तौर से स्पर्श गंगा टीम प्रत्येक रविवार को 50 से अधिक गंगा घाटों एंव गंगा के निकटतम स्थलों पर स्वच्छता अभियान लगातार चला रही है। टीम के सदस्य लगातार गंगा को प्रदूषण मुक्त करने में अपनी सहभागिता सच्चे गंगा भक्त बनकर निभा रहे हैं। गंम फॉर गंगा गेम से जुड़ने वालों में सरोज डीमरी, तन्मय, मांगेराम, अनिकेत, रीता चमोली, रिशु वालिया, संदीप त्यागी, कमल सहगल, हन्नी सैनी, शैली, ज्योति, नीतू आदि शामिल रहे।

 

 

गंगा को आवाज देती हुई जिंदगियां

Kanika Chauhan

Published in all Edition of Amar Ujala

Print Version of एक कदम गंगा नदी को साफ करने की ओर

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एक कदम गंगा नदी को साफ करने की ओर

कहते हैं जब कोई एक कदम किसी अच्छे काम की तरफ बढ़े तो लोग अपने आप आपके साथ जुड़ने लगते हैं। गंगा भारत की पवित्र नदियों में से एक है जो आज बेहद दूषित हो चुकी है या यूं कहूं कि हमारी गंगा नदी अब बिमार है।

कहते हैं जब कोई एक कदम किसी अच्छे काम की तरफ बढ़े तो लोग अपने आप आपके साथ जुड़ने लगते हैं। गंगा भारत की पवित्र नदियों में से एक है जो आज बेहद दूषित हो चुकी है या यूं कहूं कि हमारी गंगा नदी अब बिमार है।

गंगा नदी के दूषित होने का हाल ये हो गया कि लोग दिन पर दिन उसे गंदा करते रहे और वो गंदी होती रही। जैसे मानो कह रही हो अब तो मुझे और गंदा न करो। हम जिस नदी को पूजते है उसी नदी को दूषित भी हम कर रहे हैं। गंगा नदी दूषित होती जो रही थी तभी उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने गंगा की पुकार को सुना और 17 दिसंबर 2009 में स्पर्श गंगा का शुभारंभ ऋषिकेश में किया। जिसमें राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्रों ,एनसीसी , स्थानीय लोगों, संस्थाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।

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स्पर्श गंगा के बारे में और अधिक जानने के लिए हमने स्पर्श गंगा के संयोजक शिखर पालीवाल के साथ कुछ बातें की तो आइए स्पर्श गंगा को थोड़ा और जाने….

शिखर पालीवाल ने बताया कि बढ़ती आबादी के दबाव से उपजे अवशिष्ट पदार्थों ने आज इन नदियों को दूषित कर दिया है। हम रोज़ पवित्र नदियों का आह्वान तो करते हैं लेकिन खुद नदियों को मैला करने पर तुले हैं। तन और मन की निर्मलता हमें नदियाँ ही प्रदान करती है अत: हमारा दायित्व बनता है कि हम नदी और घाटों को निर्मल बनाए रखे। इसीलिए स्पर्श गंगा को हर उस राज्य में अभियान की तरह चलना चाहिए जहां-जहां से गंगा प्रवाहित होती हैं।

NSS, NCC, स्थानीय लोगों और संस्थाओं के साथ ही साथ गंगा सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के लगभग 80000 सदस्यों और गढ़वाल विश्वविद्यालय के क़रीब दो हज़ार छात्रों ने अभियान की शुरूआत की। मुझे यह बतातते हुए बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि आज क़रीब 5000 युवा, महिलाएँ एवं बच्चे लगातार हर रविवार को इस अभियान में अपना योगदान दे रहे हैं। हमारे लिए सबसे ज्यादा गर्व की बात तो यह कि इस अभियान की ताकत महिलाएँ और युवतियां हैं। उत्तराखंड के ज़िले हरिद्वार में कार्यरत तीस टीमों में से बारह टीमों का प्रतिनिधित्व भी महिलाएँ ही करती हैं।

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जहाँ तक मेरा मानना है कि हजारों-लाखों लोग गंगा को साफ़ करने में समर्थ तो हैं पर सफल तब तक नहीं हो पाएंगे जब तक जन-जन के अंदर ये जागरूकता ना पैदा की जाए कि गंगा जो हमारी आस्था की पहचान है और जीवनदायिनी भी है जो दो तिहाई जनसंख्या का सीधा भरण-पोषण भी करती है। अगर यह बात जन भागीदारी के माध्यम से सबको समझायी जाए कि गंगा के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है तो मैं समझता हूँ कि यह अभियान सार्थकता की ओर है।

देखिए स्वच्छता में ही ईश्वर का वास होता है। तीर्थ स्थान लोगों में आस्था का संचार करते हैं, साफ़ सुथरा जल, स्वच्छ वातावरण लोगों को आकर्षित करता है उसी तरह यह स्पर्श गंगा अभियान से लोगों के मन में आस्था और तन में स्वच्छता को बढ़ावा देगा तो कहीं न कहीं श्रद्धालुओं की तादाद भी बढ़ेगी।

आज भारत वर्ष में दो तिहाई युवा ही निर्णायक भूमिका निभा रहा है जिस तरफ़ युवा चलेगा उस तरफ़ देश बढ़ेगा और युवाओं की सहभागिता इस अभियान में यह सुनिश्चित कर रही है आज का युवा प्रधानमंत्री की राष्ट्र निर्माण के यज्ञ में अपनी आहुति दे रहा है।

यह मेरी सोच है कि जितना ज़्यादा युवा स्वच्छता के अभियान में बल देगा ये उतना ही देश को बदलने में मदद करेगा।

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इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारे द्वारा किया जा रहा जनजागरण और हमारे द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान का स्तर और उसका प्रभाव तब ज़्यादा बढ़ेगा जब हम सरकारी तंत्रों और उपकरणों के साथ इस अभियान में आगे बढ़ेंगे।

गंगा को भविष्य में भी साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए मैं तो कहूंगा कि भविष्य में इस तरह की अभियानों की कभी ज़रूरत ही न पड़े। यह तभी फलदायी होगा जब गंगा और उसके आस-पास की जगहों को साफ़ करने की बजाय लोगों के मन में गंगा को साफ रखने का नजरीया हो। राष्ट्र निर्माण का बीड़ा उठाया जाए तो यह इस तरह के अभियानों के माध्यम से ही सफल होंगे।

नदी किनारे घाट नहीं बाघ बग़ीचे बनाए जाए, पौध-रोपण किया जाए, नदी किनारे आबादी घटायी जाए, पोलिथीन प्रतिबंधित हो, धर्मगुरु ऐसी प्रथाओं का विकल्प दें जिससे लोग नदियों में धार्मिक वस्तुओं किताबों कपड़ों को डालना बंद करे, स्कूल-कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों में नुक्कड़ नाटकों और सभाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाए की नदियाँ ही हमारी जीवनरेखा हैं।

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