जन्म का रिश्ता हैं!

By Kavita Gulati एक वृद्ध माँ रात को 11:30 बजे रसोई में बर्तन साफ कर रही है, घर में दो बहुएँ हैं, जो बर्तनों की आवाज से परेशान होकर अपने पतियों को सास को उल्हाना देने को कहती हैं. वो कहती है आपकी माँ को मना करो इतनी रात को बर्तन धोने के लिये हमारी…

अंजान राहें !!!!!!

चल रहें थे जब हम अंजान राहों पर, मिला था हमें कोई प्यारा सा उन्हीं राहों पर…. भटक रहें थे जब हम उन राहों पर, मिला था तभी वो हमें उन राहों पर…. खुश हुए थे हम बहुत उस से यूँ मिल कर, चल रहें थे जब हम अंजान राहों पर!!!!!!!

एक अनकहा सा एहसास !!

“न उम्र की सीमा हो, न जन्मों का हो बधंन.. जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन… “प्यार तो ज़िंदगी का सार है, दुनिया में प्यार जैसी खूबसूरत बात ही नहीं, प्यार वो है जो किसी शक्स को ज़िंदगी के बेहद करीब ले आता है।

किताबों से दूर होती जा रही युवा पीढ़ी

“किताबें झांकती हैं बंद अलमारी के शीशों से बड़ी हसरत से तकती हैं… महीनों अब मुलाक़ातें नहीं होतीं, जो शामें उन की सोहबत में कटा करती थीं, अब अक्सर गुज़र जाती हैं कम्पयूटर के पर्दों पर बड़ी बेचैन रहती हैं किताबें उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है।“

Household items सोच से भी सस्ता मिलेगा यहां

किस को पसंद नहीं होता घर के हर कोने को सजाने का। ज्यादातर महिलाएं घर में हर तरह का सामान रखना पसंद करती है क्या पता कब किस चीज की जरूरत पड़ जाए। वैसे तो लोकल मार्केट में आपको सभी चाजं मिल जाती हैं। लेकिन आज हम आपको दिल्ली के एक ऐसे मार्केट के बारे…