अपना आसमान खुद बनाएगी, औरों को भी उड़ने का हौसला देगी

अवी शाम को जल्दी आ जाना आज दिल्ली वाले आ रहे हैं तुझे देखने” माँ ने टोका।

“ठीक है माँ” कहती हुई अवनी निकल गई।

एमबीबीएस करके एक हॉस्पिटल में जॉब कर रही अवनी की शादी के लिए उसके माँ बाप उसी की तरह डॉक्टर लड़का ढूंढ रहे थे, अब डॉक्टर बेटी के लिए ऐसा वैसा दामाद कैसे ढूंढ ले, इस साल अवनी 29 छू रही है।

दिन पे दिन ठाकुर साहब की चिंता बढ़ती जा रही है। अवनी हमेशा से पढ़ने में अच्छी थी, डॉक्टर बनने के बाद तो लड़कों की लाईन लग गई थी, पर हर लड़के पर एक “रेट टैग” था, किसी पर 20 लाख, किसी पर 30 लाख, किसी को क्लिनिक खोल के दे दो, तो कोई तो हॉस्पिटल की उम्मीद लगाये थे।

ठाकुर साहब तो अभी एजुकेशन लोन ही चुका रहे थे, अपनी पहली बेटी की शादी में अच्छा खासा खर्च कर चुके थे। सब तय हो जाता बात वहीं अटक जाती थी। अबकी बार तो अवनी की माँ ने मन्नत भी मानी थी।

तय समय पर दिल्ली वाले आए, अवनी को पसंद किया लेन देन तय किया, 13 लाख में बात पक्की हो गई, अवनी ने कहा “ये क्या किया पापा, कहाँ से आएगा इतना पैसा..? मुझे नहीं करनी शादी, आप लोगो का ख्याल कौन रखेगा…??”

ठाकुर साहब ने बोला “अरे तो इसी शहर में तो हो रख लेना ख्याल”! कहीं ऐसा भी होता है उम्र भर घर नहीं बिठा सकते”।

अवनी जानती थी, उसकी बहन भी तो उसी शहर में थी पर साल में एक बार आ जाये बहुत होता था।

घर में तैयारियाँ शुरू हो गई। 2 महीने में शादी थी, अवनी से न रहा गया तो रोहित से पूछ ही बैठी “मेरे माँ पापा का ध्यान मुझे ही रखना है, सोच के शादी करना”।

रोहित ने बोला “हाँ हाँ क्यों नहीं”। रोहित की बात सुन कर तसल्ली मिल गई अवनी को।

शादी के दिन पास आ रहे थे, और ठाकुर साहब पैसा जुटाने में लगे थे, गाओं की ज़मीन बिकने का नाम नहीं ले रही थी। आखिर शादी वाला दिन भी आ गया, बारात आई रस्मे शुरू हुई और ठाकुर साहब का दिल बैठा जा रहा था, रोहित के पापा से अलग ले जाकर परेशानी जाहिर की, बोला “आप ज़मीन के कागज़ ले लीजिये, मेरे पास 5 लाख से ज्यादा कैश नहीं है, ये ज़मीन पूरे 12 लाख की है”।

बस फिर क्या था रोहित के पापा ने चिल्लाना शुरू किया ” वाह बंजर ज़मीन दे कर लड़का चाहिए, धोखा किसी और को दीजियेगा हमने बहुत देखे ये तमाशे “!!

धीरे धीरे बात सबको पता चली और अवनी तक भी पहुंची, और अवनी ने वही किया जो एक पढ़ी लिखी डॉक्टर बेटी को करना चाहिए, खुद आ कर बोली स्टेज पर “सुनिये पूरी ठाकुर बिरादरी, “मैं ये बारात लौटा रही हूँ इनके बेटे की कीमत नहीं है हमारे पास, सिर्फ 13 लाख में बिकेंगे जिसको खरीद्ना हो अभी खरीद सकता है, और हाँ हमारे यहाँ कोई रिश्ता लेकर ना आए क्योंकि मेरे माँ बाप का मैं ही बेटा हूँ मैं ही बेटी, किसी को ऐतराज हो तो बताये…??”

कुछ लोग अवनी की तारीफ करते, कुछ लोग पागल कहते, कुछ लोग हँसी उड़ाते वापस चले गए”। “ये वो मूक समाज है, जो सिर्फ कहीं शामिल होता है तमाशा देखने के लिए, और खड़ा होता है सिर्फ ऊँगली उठाने के लिए ….वो समाज जिसका डर 29 साल की बेटी के बाप को होता है, वो समाज जिसकी वजह से एक बाप औकात से बाहर दहेज देने को तैयार हो जाता है….वो समाज जिसकी वजह से एक डॉक्टर बेटी भी बोझ लगने लगती है”

क्यों कोई अपनी बेटी को डॉक्टर बनाये, लोन भी चुकाये, और अच्छे दामाद के लिए बिक भी जाए…? क्यों नहीं बेटी बोझ लगे…? पढ़ाओ भी दहेज भी दो..??

सिर्फ फ़ेसबुक डीपी बदल कर “मेरी बेटी मेरा अभिमान” लिखने से बाप के कांधे का बोझ कम होगा क्या..?

जो आज वक़्त के साथ दोगुना हो गया है. पता नहीं क्यों हर वर्ग की लड़की और उसके माँ बाप, ये सब झेलने को मजबूर हैं, दहेज प्रथा का विरोध सिर्फ मौखिक जुमला बन के रह गया है। ज़रूरत है एक सख्त कानून की, और अवनी जैसी बेटिओं की..!! मैं जानती हूँ अवनी अपना आसमान खुद बनाएगी, और औरों को भी उड़ने का हौसला देगी।

Author: Read Write

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