जानें रक्षाबंधन पर्व का शुभ मुहूर्त और इसे मनाने का सही तरीका

आप सभी जानते हैं कि भारत वर्ष धर्म, त्योहार और तीर्थों की तपोभूमि है। जिसके चलते ही हर वर्ष हिन्दू धर्म में कई व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इन्हीं त्योहारों में से रक्षाबंधन भी एक सबसे प्रमुख त्योहार है, जो भाई और बहन के प्रति असीम स्नेह और लगाव को दर्शाता है। इसकी इसी महत्त्वता को देखते हुए भाई-बहनों को हर वर्ष इस पर्व का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।

रक्षाबंधन इस वर्ष भारतीय स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को आ रहा है, जहाँ बहनें भाइयों की खुशहाल जीवन की कामना करते हुए उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र यानि राखी बांधती हैं। तो वहीं भाई भी इस पर्व पर अपनी बहन को उसके सम्मान और रक्षा के लिए उसे वचन देते हैं। हिन्दू पंचांग की माने तो रक्षाबंधन का ये त्योहार हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस साल रक्षा बंधन का ये पवित्र त्योहार काफी खास रहने वाला है। क्योंकि इस वर्ष इस दिन एक अद्भुत संयोग बन रहा है जो सालों में आया है, जहाँ रक्षा बंधन के दिन भद्रा काल नहीं होगा। जिसके चलते इस बार राखी बांधने की समय अवधि सामान्य से लंबी रहेगी और इस वजह से बहनें पूरे दिन अपने भाईयों को राखी बांध पाएंगी।

रक्षा बंधन मुहूर्त 2019

राखी बांधने का मुहूर्त प्रात: 05:49:59 से सांय 18:01:02 तक

अवधि

12 घंटे 11 मिनट

राखी बांधने का अपराह्न मुहूर्त

13:44:36 से 16:22:48 तक

विशेष : यह मुहूर्त नई दिल्ली के लिए प्रभावी है। जानें अपने शहर में राखी बांधने का मुहूर्त और शास्त्रीय विधान

राखी बांधने का मुहूर्त और उसकी पूजा विधि

रक्षाबंधन के पर्व पर हर बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है। जिस प्रकार किसी भी मंगल कार्य को करने के लिए एक सही प्रक्रिया निर्धारित की जाती है, ठीक उसी प्रकार इस पर्व पर भी विधिवत् तरीके से राखी बांधने का विशेष महत्त्व है, जिससे इस पर्व पर शुभाशुभ फलों की प्राप्ति होती है।

  • रक्षा बंधन के दिन सबसे पहले भाई बहन जल्दी सुबह उठकर स्नान आदि कर, साफ-सुथरे कपड़े पहनकर सूर्य देव को जल चढ़ाएं।
  • फिर घर के मंदिर में या पास ही के मंदिर जाकर पूजा अर्चना करें।
  • भगवान की अराधना के पश्चात राखी बांधने से संबंधित सामग्री एकत्रित कर लें।
  • इसके बाद मुख्य रूप से चाँदी, पीतल, तांबे या स्टील की कोई भी साफ थाली लेकर उसपर एक सुंदर-साफ़ कपड़ा बिछा लें।
  • उस थाली में एक कलश, नारियल, सुपारी, कलावा, रोली, चंदन, अक्षत, दही, राखी और मिठाई रख लें।
  • सामग्री को सही से रखने के बाद घी का दीपक भी रखें।
  • अब यह थाल पहले घर में या मंदिर में भगवान को समर्पित करें।
  • सबसे पहले एक राखी कृष्ण भगवान और एक गणेश जी को चढ़ाएं।
  • भगवान को राखी अर्पित कर ऊपर बताएं गए शुभ मुहूर्त देख अपने भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करवाकर बिठाएं।
  • इसके उपरान्त भाई को तिलक लगाएँ, फिर राखी यानी रक्षा सूत्र बांधें और इसके बाद उसकी आरती करें।
  • बहनों को अपने भाई की लंबी उम्र के लिए राखी बांधते वक़्त इस मंत्र का उच्चारण करना शुभ बताया गया है।

“ ॐ येन बुद्धि बलि राजा “
दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वां प्रति बध्नामि ,
रक्षे मा चल मा चल ।”

  • इसके बाद अपने भाई का मिठाई से मुंह मीठा करें।
  • राखी बांधते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भाई-बहन दोनों का सिर किसी कपड़े से ढका ज़रूर होना चाहिए।
  • रक्षा सूत्र बंधवाने के बाद माता-पिता या घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।
  • अंत में भाई अपनी बहन को श्रद्धा अनुसार उपहार दे सकता है।

रक्षाबंधन का पौराणिक महत्त्व और इससे जुड़ी कथाएँ

रक्षाबंधन का पर्व प्राचीन काल से मनाया जा रहा है। महाभारत से लेकर रामायण काल तक में राखी के त्योहार का उल्लेख मिलता है।

आइये जानते हैं इससे जुड़ी प्रसिद्ध पौराणिक कथाएँ:-

द्रौपदी और श्री कृष्ण की कथा

महाभारत काल में भी राखी का एक अनूठा प्रसंग आपको सुनने को मिल जाएगा। जिसके अनुसार जब भगवान कृष्ण ने शिशुपाल का वध किया था तो माना जाता है कि उनकी अगुंली में चोट आ गई थी। उस समय वहाँ मौजूद सभी लोग श्री कृष्ण का बहता रक्त रोकने के लिए वस्त्र तलाश रहे थे लेकिन उसी समय वहीं पर मौजूद द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक भाग फाड़कर उसे भगवान कृष्ण की अंगुली पर पट्टी की तरह बांध दिया। जिस दिन यह हुआ वो दिन श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन ही बताया जाता है, इसलिए मान्य है कि द्रौपदी के इसी त्याग और स्नेह का कर्ज भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी के चीर हरण के समय उसके सम्मान की रक्षा करके निभाया था और तभी से ये पर्व आरंभ हुआ।

सिकंदर और पोरस की कथा

एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, सम्राट सिकंदर की पत्नी ने अपने पति के शत्रु पुरुवास यानि राजा पोरस को यही रक्षा सूत्र बाँधकर उन्हें अपना मुंह बोला भाई बनाते हुए युद्ध के दौरान सिकंदर को न मारने का उनसे वचन लिया था। जिसके बाद ही माना जाता है कि पोरस ने युद्ध में सिकंदर को जीवन दान दिया था। यही नहीं माना तो ये भी जाता है कि इस युद्ध के दौरान पोरस को सिकंदर पर प्रहार करने के कई अवसर मिले थे लेकिन ये राखी का वो वचन ही था जिसके चलते उसके हाथ रुक गए और उसे सिकंदर को बंदी बनाना पड़ा। हालांकि बाद में सिकंदर ने भी पोरस की इस उदारता को देखते हुए उसे उसका संपूर्ण साम्राज्य लौटा दिया था।

  • यही वो पौराणिक कथाएँ हैं जिनसे रक्षाबंधन के इस पावन त्योहार की पवित्रता और उसके महत्त्व का बोध होता है।

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