सावन शिवरात्रि में महादेव को लगाएँ इसका भोग, खुल जाएगी सोई किस्मत

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार शिवरात्रि मासिक त्यौहार है, जो हर माह पूर्णिमा से ठीक एक दिन पहले त्रयोदशी के दिन पड़ता है। लेकिन समस्त शिवरात्रियों में से दो शिवरात्रियों का हिन्दू धर्म में सबसे अधिक महत्व माना गया है। जिनमें पहला फाल्गुन त्रयोदशी है जो विशेष रूप से महा शिवरात्रि के नाम से प्रसिद्ध है और दूसरी सावन शिवरात्रि जिसका महत्व हिन्दू धर्म में सबसे अधिक है। यह त्यौहार मुख्य रूप से भगवान शिव और माँ पार्वती को समर्पित होता है, इस दिन भक्तजन भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा को व्यक्त करते हुए शिवलिंग का गंगा जल से अभिषेक करते हैं।

शिव तेरस ( मासिक शिवरात्रि )

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के तेरहवें दिन आती है (जिसे संस्कृत भाषा में त्रयोदशी कहा जाता है)। वहीं हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रति माह में दो पक्ष (कृष्ण और शुक्ल) होते हैं। अतः त्रयोदशी एक माह में लगभग दो बार पड़ती है। इसमें कृष्ण पक्ष के तेरहवें दिन आने वाली त्रयोदशी भगवान शिव को सबसे प्रिय होती है। ऐसे में भगवान महादेव के प्रिय होने के नाते इस तिथि को पौराणिक काल से ही भगवान शिव के साथ जोड़कर देखा जाता है, जिसके चलते इसे शिवतेरस या मासिक शिवरात्रि कहा जाता है।

सावन शिवरात्रि का महत्व

हर वर्ष श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) के महीने में आने वाली सावन शिवरात्रि को काँवड़ यात्रा का समापन दिवस भी कहा जाता है। इस दिन विशेष रूप से शिव भक्त हरिद्वार, गौमुख व गंगोत्री, सुल्तानगंज की गंगा नदी, काशी विश्वनाथ, बैद्यनाथ, नीलकंठ और देवघर सहित अन्य पवित्र स्थानों से गंगा जल अपनी काँवड़ में भरकर अपने-अपने स्थानीय शिव मंदिरों में शिवलिंग का उस गंगा जल से अभिषेक करते हैं।

सावन मास से जुड़ी कुछ विशेष बातें और उसका पौराणिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय मास है और सावन माह में पड़ने वाली शिवरात्रि सकारात्मक उर्जा का स्रोत होती है, इसलिए इस दिन भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करने या शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भक्तों को पापों से मुक्ति और भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सावन शिवरात्रि 2019 का शुभ मुहूर्त

पंचांग अनुसार सावन 2019 में सावन शिवरात्रि 30 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है। इस दिन भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह दोपहर 12 बजकर 06 मिनट से अगली सुबह यानी 31 जुलाई, बुधवार की दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक होगा। हालांकि यह पूरा ही दिन बेहद पवित्र माना जाता है, इसलिए भक्त इस दिन मुहूर्त के अलावा भी पूजा कर सकते हैं।

शास्त्रों अनुसार सावन की शिवरात्रि मनुष्‍य के सभी पापों और दोषों को धोने में सक्षम होती है। इसलिए सावन की शिवरात्रि का महत्व व्यापक है। इस दिन जो भी व्यक्ति श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा करता है और व्रत रखता है तो उसके समस्त पापों का नाश स्वयं महादेव कर देते है। इसके अलावा जो लोग अविवाहित होते हैं इस व्रत को करने से उन्हें भी मनचाहा जीवनसाथी मिल जाता है। वहीं, दांपत्य जीवन में प्रेम की प्रगाढ़ता बढ़ती है।

सावन शिवरात्रि की पूजा विधि

भगवान शिव को भोले के नाम से भी जाना जाता है। जो कोई भक्त भोलेनाथ को सच्चे मन से याद करता है महादेव उनकी फरियाद को ज़रुर सुनते हैं। शिव की पूजा करने की विधि भी बेहद आसान होती है, जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति सामान्य पूजा और सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना कर उन्हें प्रसन्न कर सकता है। आइये जानते हैं सावन शिवरात्रि की सही पूजन विधि:-

सावन शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्‍नान कर मन और शरीर को पवित्र कर लें।
फिर घर पर या मंदिर में शिव जी की पूजा करें और शिव जी के साथ माता पार्वती और नंदी गाय को भी पंचामृत जल अर्पित करें।

इसके पश्चात भगवान शिव रूपी शिवलिंग पर बेल पात्र, शहद, दूध, अभिषेक के लिए पवित्र जल (जिसमें जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, इत्र, चंदन, केसर, भांग सभी मिले हो) आदि एक एक करके शिव मंत्र- “ॐ नमः शिवाय” के जाप के साथ चढ़ाते जाएँ।
इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें और फिर शिव आरती करें।
इस समय ध्यान रहें कि भगवान की पूजा सच्चे दिल से ही करें।

व्रत खोलते समय भगवान शिव को लगाए भोग

माना जाता है कि भगवान भोलेनाथ को अपने भक्तों द्वारा जो भी चढ़ाया जाता है उसे वो बेहद प्रसन्नता से ग्रहण करते हैं। हालाँकि सावन शिवरात्रि पर व्रती को रात के समय अपना व्रत खोलने से पहले भगवान शिव को भोग में कुछ चीजें विशेष रूप से चढ़ानी चाहिए। जानते हैं उनके बारे में कहा जाता है कि गेहूँ से बनी चीजें अर्पित करने से भोलेनाथ अपने भक्त से जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं।

माना जाता है कि एश्वर्य पाने के लिए भक्त शिव जी को मूंग का भोग लगा सकते हैं। कहते हैं कि अविवाहित लोग मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए व जल्द शादी के बंधन में बंधने के लिए शिव जी को चने की दाल का भोग लगा सकते हैं। शिव जी को तिल या तिल का तेल चढ़ाने की भी मान्यता है। माना जाता है कि शिव को तिल चढ़ाने से भक्त के इस जन्म के साथ-साथ पूर्व जन्म के भी नष्ट हो जाते हैं।

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