चुनौती भरी एक गृहणी की जिंदगी

प्रीति चाय बनी की नहीं ..?

जल्दी लाओ आशिश ने रजाई से निकलते हुए कहा..

आज ठंड बहुत थी शरीर बर्फ की तरह जम रहा था। दिल्ली की सर्दी ने 8-10 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। पर शुक्र था आज आशिश को ऑफिस नहीं जाना था। संडे था तो आराम से अखबार उठाया और प्रीति को फिर से आवाज लगाई…

प्रीति, कहां हो यार जल्दी चाय लाओ बहुत ठंड लग रही है…

पर कोई आवाज नहीं आई.. पूरा घर में एकदम ऐसा शांत सन्नाटा कि अखबार पलटने की भी आवाज कानों को चुभ रही थी।

आशिश ने चारों ओर नजर दौड़ाई ये क्या वो किसे बुला रहा था। प्रीति वो तो रात ही चली गयी इस घर से। उसकी तो कोई गलती भी नहीं थी बेवजह उस पर इतना गुस्सा किया न जाने कितना भला बुरा कह दिया। शायद कल रात आशिश के अंदर का मर्द जाग गया था जो जरा सी बात पर प्रीति पर बरस पड़ा। क्या-क्या नहीं कहा उसे… तुम करती ही क्या हो। बस घर पर रहकर नई-नई फरमाइश करती हो।

पैसा कमाओ तब पता चलेगा कि कितनी मेहनत करनी पड़ती है। उड़ाने को तो कितना भी उड़ा दो… तुम्हारी रोज-रोज की नई डिमांड से तंग आ गया हूं। क्या करती हो इतने कपड़ों का? अलमारी भरी पड़ी है फिर भी शॉपिंग के लिए मेरा ATM कार्ड चाहिए। अपने जन्मदिन पर महंगी ज्वैलरी चाहिए। कितना पैसा बिगाड़ती हो तुम। घर मैनेज करना तो आता नहीं तुम्हें। कितनी फिजूलखर्ची करती हो।

कभी सोचा है कि ये तुम्हारे बाप का घर नहीं जहां तुम्हें हर चीज एक आवाज में मिल जाती थी। सही कहा था मेरे मम्मी- पापा ने कि बड़े घर की लड़की है नखरें भी बड़े ही होंगे पर मैं ही पागल था जो तुम्हारी खूबसूरती पर फिदा हो गया।

आशिश बोले जा रहा था और प्रीति की आंखों से आंसू बह रहे थे। इतनी कड़वी बातें सुनकर उसका दिल टूट गया। ऐसा नहीं था कि आशिश उसे प्यार नहीं करता था पर ना जाने क्यों हमेशा उसे अपनी जॉब की अकड़ दिखाता था। उसे लगता था कि प्रीति घर में रहकर अपनी सारी इच्छाएं मार दे।

प्रीति ने भी आशिश को कोई जबाब नहीं दिया। बस, अपना बैग उठाया और कपड़े रख कर रात को ही अपने मायके रवाना हो गयी।

सिर्फ एक रात में आशिश को प्रीति की अहमियत पता चल गई थी। प्रीति सिर्फ उसकी घर में रहनेवाली पत्नी ही नहीं बल्कि उसके घर की जान थी। उसके बिना ये घर सिर्फ एक ईंट पत्थर का मकान लग रहा था। हर तरफ बस प्रीति की ही छवि नजर आ रही थी। पास रखा पानी का जग खाली पड़ा था… किचन में रखे जूठे बर्तन मानो आशिश को मुँह चिड़ा रहे थे.. पास पड़ा दूध का भगोना खाली पड़ा था आशिश ने चाय बनाने के लिए बर्तन उठाया पर दूध… कहां है?

शायद प्रीति ने थैली लाकर फ्रिज में रखी होगी पर फ्रिज खोल कर देखा तो दूध ही नहीं था। तब उसे याद आया कि रोज सुबह प्रीति 6 बजे उठकर मॉर्निंग वॉक जाती थी तो दूध लाती थी। उसके उठने से पहले ही दूध उबाल कर बिस्तर पर ही गर्म चाय हाजिर हो जाती थी। पर आज चाय के लिए भी आशिश को इतनी ठंड में कितनी मुश्किल हो रही थी वो तो ऐसे ही कह देता था कि चाय लाओ जल्दी। पर आज उसे पता चल रहा था कि एक चाय का कप ऐसे ही नहीं मिल जाता…

कितना काम करती थी प्रीति मैंने कभी सोचा ही नहीं, जब वो ऑफिस से आये तो उसे प्रीति का मुस्कुराता हुआ चेहरा मिल जाये साथ में कॉफी के साथ उसके मनपसंद स्नैक्स और फिर रात को गर्मागर्म डिनर….

क्या ये सब प्रीति के बिना संभव था? आशिश मन ही मन आत्मग्लानी से भर गया। उसे बहुत ही शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि वो कितना स्वार्थी है जो अपनी पत्नी के किए कामों को कोई महत्व नही देता उसे तो सिर्फ बाहर जाकर जॉब करना ही काम दिखता है। लेकिन प्रीति तो कहीं ज्यादा 24 घंटे उसके घर में बिना किसी स्वार्थ के काम करती है किसके लिए ..? सिर्फ उसके लिए ही ना…

उसे गर्म चाय मिल जाये… हैल्दी नाश्ता मिल जाये टाइम पर उसका मनपसंद टिफन पैक हो जाये… उसके कपड़े धुल जाएं… वो ऑफिस टाइम पर जा पाता है क्योंकि प्रीति उसका हर काम रैडी करके रखती थी… वो तो बस आवाज लगा देता था उसे ये अहसास नहीं था कि इस सब के पीछे प्रीति की कितनी मेहनत है… वो तो यही सोचता था कि प्रीति सारा दिन करती ही क्या है?

आज प्रीति के जाने के बाद आशिश को अहसास हो गया था कि उसने प्रीति के साथ कितना गलत व्यवहार किया है। उसने बिना देर किए गाड़ी की चाबी उठायी और प्रीति से माफी मांगने और उसे अपने घर लाने के लिए रवाना हो गया।

दोस्तों एक गृहणी की जिंदगी कितनी चुनौती भरी होती है। वो 24 घण्टे सिर्फ एक घर के लिए ही जीती है। फिर क्यों उसकी छोटी-छोटी जरूरतों को भी फिजूलखर्ची का नाम दिया जाता है क्यों उसका काम किसी की नजर में नहीं आता। अगर आपकी पत्नी आपसे उम्मीद नहीं करेगी तो किससे करेगी? वो आपके मकान को घर बनाती है।

आपको इस लायक बनाती है कि आप बाहर जाकर बिना किसी चिंता के जॉब कर सके तो क्या पति होने के नाते आपका फर्ज नहीं बनता कि उसकी खुशियों के बारे में सोचें। कभी-कभी बिना कहे भी उसको उसकी जरूरत के लिए कुछ धन दें जिससे वो अपनी इच्छानुसार खर्च कर सके…

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