मेरी मां की दुनिया!!

लोग कहते हैं मां के कदमों तले जन्नत होती है पर मैं कहती हूं कि मेरी मां ही मेरी जन्नत हैं… माँ कहने को तोसिर्फ एक शब्द हैं पर इस एक शब्द में मेरा पूरा संसार बसा है। सुबह की डांट से लेकर रात की लोरी तक मां की हर बात जैसे कोई सुरीलागीत हैं। हम पूरी ज़िन्दगी पैसा, नाम, रुतबा, शोहरत इन्हीं चीज़ों के पीछे भागते हैं पर वो मां ही होती हैं जो बिना किसी स्वार्थ के सिर्फ अपने बच्चोंकी खुशियों के लिए भागती है।

ज़िन्दगी सफर में न जाने कितने लोगों से मुलाकात होती है जिनमें लोग जाते हैं और जाते हैं लेकिन जो हमेशा साथ खड़ी रही वो है मेरी मां। माँ हीमेरा पहला शब्द, पहला स्कूल, पहली टीचर यहां तक की मेरी पहली दोस्त भी मेरी मां ही है। चोट मुझे लगती थी पर दर्द मेरी मां को होता था, रातोंको पढ़ाई मैं करती पर एग्जाम मेरी मां का होता, परेशान मैं होती पर नींद मेरी मां की उड़ जाती, दुःख में मैं होती हूं पर आंसू मेरी मां के बहते हैं, मां शायद ऐसी ही होती है खुद सारे दुःख, सारी तकलीफ़ें सहती है पर बच्चों की खुशियों पर कभी आंच तक नहीं आने देती।

मेरे लिए मेरे दोस्त, फॅमिली, ऑफिस, कॉलेज, रिश्तेदार शायद यही मेरी दुनिया है पर मेरी मां के लिए मैं ही उनकी पूरी दुनिया हूं। मैं आज भी हैरान रह जाती हूं किकैसे मेरी मां मेरे दिल का हाल बिना कहे जान जाती हैं। किसी ने सही कहा है कि भगवान हर जगह मौजूद नहीं हो सकते इसीलिए उन्होंने मां कोबनाया।

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